रविवार, 1 दिसंबर 2013

क्या हो गया....??

रोजगार को गया था बेरोजगार हो गया,
शराफत से चला था बदमाश हो गया।
स्वाभिमान से चला था अभिमान हो गया,
कमाई को चला था कर्जदार हो गया।
चाटुकारो के इस दौर में ये आम हो गया,
कामगार को मिला ठेंगा, लौंडा बेरोजगार हो गया।
बेरोजगारी के दौर में ये कहना आम हो गया
यहां सबको है दुख: आपका नाम हो गया.................
तेजपाल न हो गया बवाल हो गया,
टीवी चैनलों से आसाराम-साईं,
सोने की खुदाई सब गायब हो गया।
खबर ये भी है आप का स्टिंग हो गया,
ताजा सर्वे में आप का हौसला धड़ाम हो गया ।
मीडिया का नाम बदनाम हो गया,
पेड न्यूज का है ये दौर ये कहना आम हो गया।
यहां सबको है दुख: आपका नाम हो गया....................अंकित शर्मा की कलम से

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