काम तो चलाना पड़ता है....बेरोजगारी के इस दौर में
पैसे न हो तो उधारी से,
सिगरेट न हो तो बीड़ी से,
बीयर न हो तो विस्की से,
विस्की न हो तो रम से,
बोतल न हो तो अद्धे से,
काम तो चलाना पड़ता है।
पेट्रोल महंगा हो तो डीजल से,
डीजल महंगा हो तो सीएनजी से,
सब्जी महंगी हो तो चटनी से,
काम तो चलाना पड़ता है।
नौकरी न हो तो बेगारी से,
बेरोजगारी के इस दौर में,
काम तो चलाना पड़ता है।
मेट्रो का किराया न हो तो बस से,
बस का किराया न हो 11 नंबर की गाड़ी से,
सफर तो तय करना पड़ता है।
मोबाइल में बैलेंस न हो तो,
मिस कॉल से काम चलाना पड़ता है।
चाय की चुस्की का भी मजा एक बटा दो करके लेना पड़ता है,
भाइया बेरोजगारी के इस दौर में काम तो चलाना पड़ता
है...................अंकित शर्मा
mast
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