मंगलवार, 12 नवंबर 2013

गरारी अटकनी नहीं चाहिएं




अरे ! भईया गरारी अटकनी नहीं चाहिएं......कुछ दिनों से जुमला जुबान से सरपट-सरपट निकलता है। दरअसल ये जुमला हमारे एक मित्र का पसंदीदा डायलॉग है। तो संगत का असर तो आता ही है....मुद्दे की बात करें तो बात फिर मोदी नाम से ही शुरु होगी। अगर आप मोदी के आलोचक हैं या उनके सपोर्टर तो इस बात से आप परहेज नहीं कर सकते की 2014 के लोकसभा चुनाव में कमल का फूल पूरी तरह से खिलने को तैयार है। भाजपा में अकेले मोदी ही हैं जो इस फूल को खिलाने में देसी खाद का काम कर रहे हैं बाकी पेस्टीसाइड्स तो पार्टी में काफी है जो लांग टर्म बेनिफिट देने में असमर्थ हैं अब हम नीतीश कुमार पर नहीं जाएंगे। बात मोदी की है तो मोदी की ही चलेगी दरअसल कांग्रेस भी कह चुकी है कि इस बार अगर भाजपा हारी तो वो समाप्त हो जाएगी, इसी बात को हम गरारी अटक न जाए के जरिए कह रहे हैं। अगर इस बार गरारी अटकी तो मोटर फिर कभी चल न पाएगी.....दरअसल ऐसा मैंने इसलिए कहा क्योंकि ये हम भारतीयों को ये शाप प्राप्त है कि हम अपने उपर हो रहे अत्याचार या यूं कहें कि हम किसी भी गलत के खिलाप ज्यादा समय तक बगावत नहीं कर सकते माना कि हमारे देशवासियों में एक जज्बा है जोश है लेकिन ये शापित है ठीक वैसे ही जैसा कि भगवान हनुमान को बचपन में एक संत के द्वारा किया गया था कि जब कोई तुम्हें प्रोत्साहित करेगा तब तुम्हारी शक्तियां वापस आएंगी।
ऐसा मैनें इसलिए कहा क्योंकि हमारे देश में बीते दिनों क्या हुआ मैं ज्यादा पीछे नहीं जाउंगा आपको ध्यान दिलाना चाहुंगा-रामदेव का रामलीला ग्राउंड में उनशन, अन्ना हजारे का अनशन, दामिनी रेप केस।
इन सब में एक खास बात रही कि हम लिमिटिड समय तक जोश में रहे लडे-गिरे और फिर वापस अपने काम पर लौट चले बिना कुछ हाथ में लिये,बिना न्याय लिये।
 तो इन सब बातों को करने का एक ही मतलब फिर वहीं आकर समाप्त होता है कि गरारी अटकनी नहीं चाहिएं अगर 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी पीएम बनके न उभरे और देश की कमान न संभाल पाए तो  इस देश की जनता तो शापित है जिसकी जुबान पर फिलहाल मोदी और नमो का जो जाप चल रहा है वो बंद हो जाएगा सैकडों देशवासियों की तपस्या भंग हो जाएगी।

ये जनता भूल जाएगी मोदी को............,..........................गरारी अटकनी नहीं चाहिएं(अंकित शर्मा)

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