शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

मीडिया में टिकना है..?


शुरू से शुरू करू तो काफी पीछे जाना पडेगा मुद्दे की बात काफी देर से आएगी जो कि गलत है इस लिए लेख की शुरूआत से ही लेख के शीर्षक पर बात करूंगा।
जब होश संभाला, जब खुद संभला,जब कलम संभाली,जब सोच संभाली,जब उद्देशय बनाया, अगर कुछ करना है तो यहीं करना है,कुछ बनना है तो यहीं बनना है तो केवल मीडिया को ही चुना।
लेकिन जब इस मीडिया नामी संसार को जो थोड़ा-कुछ जाना , जो कुछ यहां देखा,तो यही जान पडता है कि यहां तो काफी गंद है...बचपन में और स्कूल कॉलेजो में अक्सर अध्यापक-जन  एक कटाक्ष किया करते थे कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है लेकिन जनाब यहां तो ... पूरा तालाब ही गंदा है मछलियां ही तालाब की गंदगी से मर रही हैं
दोष किसका है,दोषी कौन है....दरअसल ये सब जानते है। लेकिन फिर भी यहां किसी के उपर कोई रोक-टोक नहीं है।
हाल ये है कि पहले सी ही यहां पुरने घाघ बैठे हैं,जो अपनी जेब में कागजों से ज्यादा जीने की दवाई लेकर चल रहे हैं फिर भी डटे हुए हैं, डरे हुए हैं...ताकि कोई नया न आ जाए जो इनकी पोल न खोल देऔर इनकी दलाली में कोई कमी आ जाए इनका हुक्का-पानी न बंद हो जाए ।
आप इस बात से परहेज नहीं कर सकते जैसे देश की कमान कैसे भृष्ट नेताओं और बलात्कारियों के हाथ में हैं ठीक वैसे जैसे कि देश की संसद में आरोपी बैठे हैं, क्रिमिनल बैठे हैं...ठीक वैसे ही यहां चैनलों की कमान,अखबारों की कमान, मीडिया हाउसों की कमान कहीं न कहीं इन्हीं लोगों के हाथों में है, वो एक काफी मशहूर कहावत है चोर-चोर मौसेरे भाई ....आगे आप खुद समझ लो...
अभी तक जहां भी काम किया तो यही जाना,यही समझा कि.....


मीडिया जगत के सत्य वचन- कर्म करोगे तो फल की चिंता करोगे नहीं,
सही काम करोगे और किसी से डरोगे नहीं,
किसी की चिलम भरोगे नहीं,
चाटुकारिता करोगे नहीं,
मेलबाजी करना पसंद करोगे नहीं,
हर वक्त मीटिंग अटैंड करोगे नहीं,
दलाली करोगे नहीं,
खबर बेचोगे नहीं...तो भइय्या एक बात गांठ बांध लो सफल पत्रकार बनोगे नहीं............अंकित शर्मा


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