शनिवार, 25 अक्टूबर 2014

चाटुकारों की चाय पार्टी में आलोचक भी दिखे



चाटुकारों के लिए थी चाय पार्टी लेकिन आलोचक भी दिखे






एक चाय बेचने वाले ने पूरे देश की जनता-नौजवान से लेकर बड़े-बुजुर्गों को अपनी चाय की प्याली में उतार लिया बीति दोपहर जहां देश भर की बहनें अपने भाईयों की लंबी उमर के लिए भइया-दोज का त्यौहार मना रही थीं तो ठीक वहीं दूसरी ओर देश की राजधानी दिल्ली में अशोका रोड़ पर भाजपा के राष्ट्रीय दफ्तर में मोदी देश के दिग्गज-पत्रकारों और संपादकों के साथ चाय की चुस्कियां ले रहे थे।
इस दौरान मोदी के आलोचक या यूं कहें जो नमो लहर को मानने से इंकार किया करते थे वो भी मोदी के साथ सेल्फी लेते दिखे।
इन सबसे एक बार फिर साबित हुआ कि समय परिवर्तनशील होता हैइंसान बड़ा अपने कर्मों और सोच से बड़ा होता है।
जिस राष्ट्र का राजा प्रजा के बीच से उठकर बना हो तो वो प्रजा के साथ अन्याय तो होते नहीं देख पाएगा इतना तो विश्वास है हमें।
तो आप क्या कहेंगे आप क्या कहेंगे या क्या कहते है ये तो हम नहीं जानते लेकिन हम यही समझे कि आपका काम बोलता है-जो भी किया जाए वो लॉन्ग टर्म बेनिफिट को देखकर किया जाए।

लंबी रेस में ही इंसान का एवरेज पता चलता है।। अंकित शर्मा

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