दिल्ली के तख्त पर अरविंद केजरीवाल विराजमान हो चुके हैं। सरकार बनाने
के चंद घंटों बाद ही उन्होंने अपने वादों के मुताबिक कई बड़े और अहम फैसले लिए और
कई घोषणाएं भी कर डाली हैं। देश में जहां पिछले काफी समय से नमो-नमो का जाप चल रहा
था तो अब आप-आप के चर्चे हो रहे हैं।
ऑटो वाले से लेकर सर्विस क्लॉस तक, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबके
बीच में दिन में कम से कम एक बार तो आप का जिक्र छिड ही जाता है। कई नेताओं को
सदमा सा बैठ चुका है रात को भी सपने में उन्हें अरविंद नजर आ गए हैं और कई नेताओं
को तो आप शब्द से नफरत हो गयी है।
देश में नमो जाप की जगह आप की लहर सी चल गयी है। जिसने भी अनिल कपूर
की अभीनीत फिल्म ‘नायक’ देखी हो या उसके बारे में सुना हो तो वो उसको अरविंद से जोड़ कर देख
रहे हैं।
लेकिन जनाब अगर देखा जाए तो फिल्म नायक में अनिल कपूर का पेशा
पत्रकारिता होता है और वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी में अगर असली नायक की बात की
जाए तो वो मनीष सिसोदिया हैं।
आप से जुड़ने से पहले मनीष पेशे से पत्रकार थे। अन्ना के अनशन से आप
के फॉउंडेशन तक मनीष का अहम रोल रहा। लेकिन अन्ना के बाद कोई रोल मॉडल बने तो वो
अरविंद, आप पार्टी के मुखिया बने तो वो अरविंद ।
तो अगर आप तुलना कर रही रहे हैं तो मनीष की तुलना नायक (अनिल कपूर) से
करें क्योंकि मुख्यमंत्री न सही शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर बैठते ही उन्होंने
फिल्मी नायक वाला काम असल जिंदगी में कर के दिखाया है और कर रहे हैं।
पैदल दफ्तर जा रहे हैं, रैन बसेरों का मुआएना कर रहे हैं और भी काफी
कुछ.........लेकिन मेरा ये लिखने का मकसद आप में कोई फूट डालना या आप की निंदा
करना नहीं बस एक विचार था जो आपके बीच प्रकट कर
दिया.................................अंकित शर्मा....:)
