सोमवार, 17 फ़रवरी 2014


सीनियर सिटिजन की श्रेणी में आ खड़ी हो चुकी है पत्रकारिता 

कलम का जोर कम हो चला है आज,
पेड न्यूज का दौर आम हो चला है आज.....


माना कि देश को आजाद कराने और अंग्रेजों से मुक्त कराने में कलम ने एक हथियार की भूमिका निभाई। इस हथियार का इस्तेमाल क्रांतिकारियों ने खूब किया चाहें वो नरम दल हो या गरम दल, सभी ने इसका खूब उपयोग किया और जागरुकता फैलाई। इतना ही नहीं अगर हम और पीछे जाएं तो हमारे वेद-उपनिषद, ग्रंथ आदी भी कलम के जरिए ही लिखे गए हैं।
लेकिन आज हम और हमारे देश को आजाद हुए करीब 67 वर्ष हो चले हैं लेकिन हमारी कलम बद से बद्तर हो चली है-ये कलम चंद कॉर्पोरेटरों-राजनेताओं-भ्रष्टाचारियों-दलालों...की कठपुतली हो चली है। हमारी पत्रकारिता अब उम्र दराज हो चली है,
एक दौर था जब कलम चलाने वालों में एक जुनून हुआ करता था, इस जुनून के चलते वो किसी भी कीमत पर किसी भी खबर को लेकर कोई कंप्रोमाइज नहीं करते थे।
आज इस कलम की कला को व्यापार बना लिया गया है-कलम की जगह पहले टाइपराइटर ने ली-फिर कंप्यूटर ने-अब आप किसी से कह भी नहीं सकते कि आप अपनी कलम का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अब आप की कलम की कला की कद्र नहीं है बल्कि आपकी चाटुकारिता की कीमत है-आज न्यूज चैनल्स में खबरों का सौदा होता है- जिसके बाद आपके द्रवारा लिखी गयी खबर का पोस्टमार्टम कर दिया जाता है।

पोस्ट अभी बाकी है आगे की कहानी अगले अंश में.......अंकित शर्मा